खुशनुमा जीवन जीने के 3 मूल मंत्र

खुशनुमा जीवन जीने की कला- पहाड़ जैसी बात को रूई समान बनाने के लिए दुआओं का खाता जमा करना है। दुआ और बद्दुआ ऐसी चीजें है जो दिखती नहीं है परन्तु लगती जरूर हैं। उदाहरण के लिए हम देखते हैं कि कई व्यक्ति छोटे-छोटे कार्यों मे विघ्नों मे घबरा जाते हैं और कई

व्यक्ति बड़ी-बड़ी परिस्थितयों को भी सहज पार कर लेते हैं। कारण है आत्मविश्वास की कमी या आत्मविश्वास की वृद्धि। आत्मविश्वास बनता है दुआओं से और दुआएँ मिलती हैं सभी के साथ सच्चा रहने से। दुआएँ प्राप्त करने के लिए और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए निम्नलिखित तीन मूलमंत्रो को जरूर उपयोग मे लाएँ।



कृपया

कृपया शब्द जब प्रयोग मे लाया जाता है तो खुशी प्रदान करता है। जब भी हमें किसी से कुछ कहना है, चाहे वो छोटा हो या बड़ा, तो नम्रता से ही बोलें, जैसे, कृपया आप मुझे एक कप चाय देंगे? इस मंत्र से काम बनने के 80% चांस बढ़ जाते हैं। दूसरा व्यक्ति तन के साथ-साथ मन से भी हमसे जुड़ जाता हैं। नहीं तो व्यक्ति यदि तन से हमारे साथ हो पर मन से न हो, तो काम बनने के बजाय बिगाड़ देता हैं। यह सच हैं कि व्यक्ति जब मन से काम करता हैं तो ज्यादा से ज्यादा सफलता मिलती हैं। मन में उमंग, उत्साह व खुशी बनी रहती हैं। सामने वाला व्यक्ति मूड़ न होने पर भी कृपया शब्द सुनकर अपनी शुभ भावनाओं के साथ हमारा सहयोगी बन जाता हैं।



धन्यवाद


आज हम देखते हैं कि स्कूलों में छोटे-छोटे बच्चों को भी ये बाते जरूर सिखाई जाती हैं कि जब आपको कोई चीज दे, आपकी मदद करे, तो उसको शुक्रिया या धन्यवाद बोलें। अगर बच्चा नहीं बोलता तो हम   बार-बार कहतें हैं। बेटा धन्यवाद बोलो। हम अपने से पूछें, हम ऐसा करते हैं क्या? धन्यवाद बोलने से सामने वाला बहुत खुश हो जाता हैं। हम देखते हैं कि घर में पत्नी सारा दिन कितना भी काम करे या पति कितना भी थका-हारा घर आये लेकिन कोई किसी का धन्यवाद नहीं करता। फिर बच्चे भी माता-पिता से यही सीखते हैं। हमें अपने अंदर से देह अभिभान को खत्म करना पड़ेगा। तभी हम एक-दो के सहयोगी बनकर आपस में धन्यवाद का प्रयोग कर सकते हैं। धन्यवाद कहना माना दुआ देना और दुआ लेना। इसलिए धन्यवाद बोलने की अपनी एक आदत बना लें।

गलती महसूस करना

जब हम से कोई गलती हो जाये तो हम गलती हो गई (Sorry)’ कहते है तो पता चलता है कि हमने अपनी गलती को महसूस किया। दोबारा वह गलती ना हो, यह भी पक्का करते हैं। ऐसा कहने से सामने वाला भी शांत हो जाता है और हम भी अंदर से हल्के हो जाते हैं। कहा भी जाता है, गलती इंसान से ही होती है लेकिन महान वो है जो गलती करने के बाद उसे स्वीकार कर ले। गलती स्वीकार करने से दोबारा उस गलती को न करने के चांस बढ़ जाते हैं। गलती छुपाने से और भी ज्यादा गलतियाँ होती हैं। गलती किसी से भी हो, चाहे छोटा हो या बड़ा, गलती जरूर स्वीकार करनी चाहिए। इससे हमारे संबंध भी मधुर बन जाते हैं।



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