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हम जानते सब हैं, करते कुछ नहीं—क्यों?

  आप जानते सब हैं , करते कुछ नहीं—क्यों ? हममें से बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें पता होता है कि उन्हें क्या करना चाहिए। किस समय उठना है , क्या सीखना है , पैसे कहाँ खर्च नहीं करने हैं , शरीर के लिए क्या अच्छा है , कौन-सी आदत छोड़नी है और कौन-सा काम शुरू करना है—जानकारी की कमी नहीं होती। फिर भी कई बार महीनों तक हमारी जिंदगी में कोई खास बदलाव नहीं आता। यहीं से असली सवाल शुरू होता है। हम किसी वीडियो में discipline के बारे में सुनते हैं , किसी किताब में सफलता का तरीका पढ़ते हैं , किसी एक्सपर्ट की सलाह देखते हैं और उस समय लगता है—“हाँ , यही तो करना है।” लेकिन वीडियो बंद होते ही हम फिर पुराने routine में चले जाते हैं। समस्या यह नहीं है कि हमें पता नहीं है। समस्या यह है कि पता होने और करने के बीच बहुत बड़ा अंतर है। जानना और करना दोनो अलग चीजें है किसी काम के बारे में जान लेना दिमाग को एक तरह की संतुष्टि देता है। आपको लगता है कि आपने कुछ सीख लिया , जबकि असली बदलाव तब शुरू होता है जब वही चीज आपके व्यवहार में दिखाई देती है। वैज्ञानिक कारण ( Psychological Factor ) हमारा द...

गीता पढ़ने के बाद भी इंसान क्यों नहीं बदलता? असली समस्या ज्ञान की नहीं है

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  गीता पढ़ने के बाद भी इंसान क्यों नहीं बदलता ? असली समस्या ज्ञान की नहीं है कभी गौर किया है ? जिस इंसान ने गीता पढ़ी है , वह भी गुस्सा करता है। उसे भी पैसे की चिंता होती है। उसे भी किसी की सफलता देखकर जलन हो सकती है। वह भी अपमान का जवाब देना चाहता है। और कई बार वह जानता है कि उसे क्या करना चाहिए—फिर भी वही करता है जो नहीं करना चाहिए। तो फिर सवाल थोड़ा असहज है— अगर गीता सच में इतनी गहरी है , तो उसे पढ़ने के बाद हम वैसे ही क्यों रहते हैं ? शायद इसलिए कि हमारी समस्या ज्ञान की कमी नहीं है। समस्या यह है कि हम ज्ञान को अपने ऊपर लागू करने के बजाय कई बार अपने जीवन को सही साबित करने के लिए इस्तेमाल करने लगते हैं। यहीं से असली कहानी शुरू होती है। मान लीजिए किसी व्यक्ति ने गीता पढ़ी है। उसे पता है कि क्रोध बुद्धि को प्रभावित करता है , परिणाम के प्रति अत्यधिक आसक्ति दुख का कारण बन सकती है और इंसान को अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन फिर एक दिन उसने कोई काम शुरू किया। उसने पूरी मेहनत की , उम्मीद भी थी कि परिणाम अच्छा आएगा , लेकिन ऐसा नहीं हुआ। परिणाम उम्मीद के मुताबिक न...

भगवद्गीता की 7 ऐसी सीख जो जीवन बदल सकती हैं

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  भगवद्गीता की 7 ऐसी सीख जो जीवन बदल सकती हैं जीवन में हर व्यक्ति के सामने ऐसे मोड़ आते हैं जब उसे कोई फैसला लेना होता है , लेकिन सही और गलत के बीच अंतर समझना आसान नहीं होता। कभी जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं , कभी अपने ही फैसलों पर संदेह होने लगता है और कभी परिस्थितियां हमें अपनी क्षमता से ज्यादा बड़ी दिखाई देने लगती हैं। ऐसे समय में श्रीमद्भगवद्गीता हमें केवल धार्मिक ज्ञान ही नहीं देती , बल्कि जीवन की कठिन परिस्थितियों को समझने और सही दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा भी देती है। महाभारत के युद्धक्षेत्र में अर्जुन जब अपने कर्तव्य को लेकर दुविधा में पड़ गए , तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कर्म , कर्तव्य , आत्मा , मन और जीवन के गहरे सत्य का ज्ञान दिया। हजारों वर्ष पहले दिया गया यह ज्ञान आज भी हमारे जीवन से जुड़ा हुआ है। नौकरी का तनाव हो , व्यापार में नुकसान ,  रिश्तों में उलझन या भविष्य को लेकर चिंता—गीता की शिक्षाएं हमें परिस्थितियों से भागने के बजाय उन्हें समझदारी से सामना करना सिखाती हैं। आइए जानते हैं भगवद्गीता की 7 ऐसी बातें , जिन्हें जीवन में उतारने से हमारी सोच और हमारा द...