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रावण इतना विद्वान होकर भी क्यों हार गया? उसके पतन के 7 कारण

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  रावण इतना विद्वान होकर भी क्यों हार गया ? उसके पतन के 7 कारण   इतना ज्ञान , इतनी शक्ति… फिर भी रावण क्यों हार गया ? रामायण में रावण का नाम आते ही हमारे सामने एक ऐसे व्यक्ति की छवि उभरती है जो अत्यंत शक्तिशाली , विद्वान और पराक्रमी था। वह केवल लंका का राजा ही नहीं था , बल्कि शास्त्रों का ज्ञाता , महान तपस्वी और अद्भुत योद्धा भी माना जाता है। कहा जाता है कि रावण ने कठोर तपस्या करके अनेक वरदान प्राप्त किए थे। उसे वेद-शास्त्रों का ज्ञान था , राजनीति की समझ थी और उसके पास विशाल सेना तथा सोने की लंका जैसी समृद्ध नगरी थी। फिर ऐसा क्या हुआ कि इतना सामर्थ्यवान राजा भगवान श्रीराम के सामने पराजित हो गया ? क्या उसकी हार केवल इसलिए हुई क्योंकि श्रीराम भगवान थे ? या फिर रावण के भीतर ही ऐसी कुछ कमियाँ थीं , जिन्होंने धीरे-धीरे उसके पूरे साम्राज्य को विनाश की ओर पहुँचा दिया ? रावण की कथा का सबसे बड़ा संदेश शायद यही है कि ज्ञान और शक्ति तभी मनुष्य को ऊँचा उठाते हैं , जब उनके साथ विवेक , विनम्रता और धर्म भी हो।   आइए समझते हैं रावण के पतन के 7 बड़े कारण।   1. ...

रावण और अंगद संवाद: जीवित शव के 14 प्रकार

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रावण और अंगद संवाद: रामचरितमानस में बताए गए जीवित शव के 14 प्रकार श्रीरामचरितमानस के लंकाकांड में भगवान श्रीराम की ओर से  अंगद और रावण का संवाद आता है। अंगद रावण को समझाते हुए कहते हैं कि केवल साँस लेना ही जीवन नहीं है। यदि मनुष्य अपने विवेक , सदाचार , भक्ति और मानवता को खो दे , तो वह जीवित होते हुए भी मृतक के समान हो जाता है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने ऐसे चौदह प्रकार के मनुष्यों का वर्णन किया है , जिन्हें “ जीवत शव” , अर्थात् जीवित लाश के समान कहा गया है। यह बात किसी व्यक्ति का अपमान करने के लिए नहीं , बल्कि आत्मचिंतन और सुधार के लिए कही गई है। यह चौपाई श्रीरामचरितमानस के लंकाकांड में आती है। कौल कामबस कृपिन बिमूढ़ा। अति दरिद्र अजसी अति बूढ़ा।। सदा रोगबस संतत क्रोधी। बिष्नु बिमुख श्रुति संत बिरोधी।। तनु पोषक निंदक अघखानी। जीवत शव सम चौदह प्रानी।। स्रोत: श्रीरामचरितमानस , लंकाकांड , दोहा 31 के अंतर्गत चौपाई। 1.   कौल — गलत मार्ग पर चलने वाला यहाँ कौल शब्द का अर्थ ऐसे व्यक्ति से लिया जाता है जो अनुचित या वाममार्गी आचरण में लगा हो। जो व्यक्ति सत्य , धर्म और सदाचार...