रावण और अंगद संवाद: जीवित शव के 14 प्रकार
रावण और अंगद संवाद: रामचरितमानस में बताए गए जीवित शव के 14 प्रकार श्रीरामचरितमानस के लंकाकांड में भगवान श्रीराम की ओर से अंगद और रावण का संवाद आता है। अंगद रावण को समझाते हुए कहते हैं कि केवल साँस लेना ही जीवन नहीं है। यदि मनुष्य अपने विवेक , सदाचार , भक्ति और मानवता को खो दे , तो वह जीवित होते हुए भी मृतक के समान हो जाता है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने ऐसे चौदह प्रकार के मनुष्यों का वर्णन किया है , जिन्हें “ जीवत शव” , अर्थात् जीवित लाश के समान कहा गया है। यह बात किसी व्यक्ति का अपमान करने के लिए नहीं , बल्कि आत्मचिंतन और सुधार के लिए कही गई है। यह चौपाई श्रीरामचरितमानस के लंकाकांड में आती है। कौल कामबस कृपिन बिमूढ़ा। अति दरिद्र अजसी अति बूढ़ा।। सदा रोगबस संतत क्रोधी। बिष्नु बिमुख श्रुति संत बिरोधी।। तनु पोषक निंदक अघखानी। जीवत शव सम चौदह प्रानी।। स्रोत: श्रीरामचरितमानस , लंकाकांड , दोहा 31 के अंतर्गत चौपाई। 1. कौल — गलत मार्ग पर चलने वाला यहाँ कौल शब्द का अर्थ ऐसे व्यक्ति से लिया जाता है जो अनुचित या वाममार्गी आचरण में लगा हो। जो व्यक्ति सत्य , धर्म और सदाचार...